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आद्यशक्ति माँ सती के वचनानुसार भगवती पराशक्ति के चारण कुल में अवतार होने की परम्परा रही है। इसी परंपरा में आई श्री आवड़ माँ के अवतार के रूप में टोंक जिले के बनेडिया ठिकाणे में भगवती श्री प्रकाश बाईसा महाराज का अवतार हुआ। विक्रमी सम्वत 2021 की पोष माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शुभ शनिवार की रात्रि को पिता ठाकुर भंवरदान जी और माता राजल कंवर जी सा के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। तीन भाई और दो बहनों के साथ अन्नदाता का बचपन बनेडया गांव में ही व्यतीत हुआ। 12 वर्ष की उम्र में अन्नदाता के शक्ति रूप का प्रथम दर्शन हुआ और परिवार के लोगो को सर्वप्रथम इस दृश्य के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समय बितता गया और भगवती के अनेको परचे परवाड़े होते गए जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। अन्नदाता ने जीवनभर माँ आदिशक्ति भगवती श्री करणी इंद्र माँ की भक्ति की ज्योत जलाई और अखण्ड ज्योत पूजा करते आ रहे है। अन्नदाता के भक्ति का दीपक यदि श्री करणी माँ है तो उस दीपक की ज्योति भगवान शंकर की भक्ति है। अन्नदाता ने भगवती और श्री शंकर भगवान की भक्ति और तपस्या कर कलयुग के इस भयंकर समय मे भक्तो के कल्याण हेतु अवतार लिया है। समय बीतते बीतते भगवती ने भक्तो के संकट हरते हुए सेंकडो मंदिरो की प्राण प्रतिष्ठा करवाई और भगवती की भक्ति की ज्योति को जन जन में जगाने की कृपा करी। अन्नदाता ने बसन्त पंचमी के दिन आज से 8 वर्ष पूर्व जयपुर के पास स्तिथ आईदान का बस गांव में भक्ति का ज्योति पुंज श्री मढ़ श्री करणी सुखधाम में आदिशक्ति करणी माँ, इंद्र बाईसा ,शंकर भगवान सहित द्वय भैरवनाथ की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। हर वर्ष यहां सेंकडो की संख्या में भगतजन आते हैं जिनके कष्ट माँ जगदम्बा की कृपा से नष्ट हो जाते हैं। वर्ष 2023 में ही अन्नदाता ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा सम्पूर्ण की तथा 2024 में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ ही चार धाम की यात्रा सम्पूर्ण की। अन्नदाता के पर्चे परवाड़े चल रहे है सुर रोजाना भक्तो का तांता बढ़ता जा रहा है। हम सब भाग्यशाली है कि इस कलयुग में माँ जगदम्बा पराशक्ति के साक्षात दर्शन करने का सौभाग्य मिल रहा है।
इस पुस्तक में अन्नदाता से जुड़े हुए परवाड़े लिखने का प्रयास किया गया है। यद्यपि अन्नदाता की लीला को एक पुस्तक में और कुछ पन्नो मर समाहित करना असम्भव है। हमने हमारी आंखों से सेंकडो बेरोजगार लोगो को रोजगार मिलते देखा है, निपूतो की वंश वृद्धि होते देखा है और मरते को जिंदा होते देखा है। फिर भी हमने कुछ परवाड़े जिनके बहुत सारे लोग साक्षी रहे उनको जस पुस्तक में शामिल करने का प्रयास किया है।
अन्नदाता की कृपा से विराज शेखावत को शादी में 5 वर्ष में पश्चात एक सुंदर सी कन्या की प्राप्ति हुई। अन्नदाता ने अपने जन्मोत्सव पर विराज शेखावत की पत्नी को एक पुष्प दिया जो गर्भावस्था के 9 महीने तक एकदम ताजा रहा और अन्नदाता की कृपा से 2023 में एक कन्या की प्राप्ति हुई। इसी प्रकार अन्नदाता की कृपा से शेखावत परिवार के ही राजेन्द्र सिंह जी पुत्री के स्वास्थ्य में लाभ मिलने पर इस पुस्तक के प्रकाशन में डॉक्टर राजेन्द्र सिंह जी का सहयोग मिला है।यह पुस्तक शेखावत परिवार के और से अन्नदाता के श्री चरणों मे भेंट है।